NAVRATRI 2019 – AN EXCLUSIVE POST

NAVRATRI 2019 – AN EXCLUSIVE POST

नवरात्री का पावन महापर्व, दुर्गा पूजा एवं विजय दशमी का समापन हो चुका है। कल तक जो रंगीनीयां, सजावट और चहल पहल दिखाई दे रही थी अब वैसा नहीं है। वास्तव में, प्रति वर्ष शरद ऋतु में ये दोनों त्योहार एक ही समय में आते हैं और इनके आते ही हर मानव केे अंदर एक अजीब से हर्षोल्लास की अनुभूति होने लगती है। लोग अपने घरों को सजाने संवारने में जुट जाते हैं। हर कोई अपने घर को एक सुन्दर सी बगिया की भांति बनाने में लग जाता है। बच्चे हों या युवा, क्न्या हो या महिला, सभी नवीन वस्त्र धारण कर घर में बने मंदिर को सुगंधित फूल-पत्तियों से सजाने चल पड़ते है।

चारों ओर एक ख़ुशी  का वातावरण फैल जाता है। क्या गरीब क्या अमीर लोग हर संभव प्रयास कर नवरात्री के पहले दिन मिट्टी में जौ बो कर उसपर कलस स्थापना कर, नारियल चुन्नी चढ़ाकर दीप प्रज्जवलित कर शेर पर सवार मां दुर्गा के प्रतिमा की नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशती में वर्णित देवी के नौ रूपों की पूजा अर्चना करते हैं। इसी कारण इस पर्व का नाम नवरात्री मशहूर हुआ।

रात रात भर जाग कर लोग भारी संख्या में माता को मनाकर अपने घर तक लाने के लिए सुन्दर और मनमोहक भजनों की भेंट मां के चरणों में अर्पित करने के लिए पूरी रात जगराता करते हैं। रात रात भर नाचते गाते और अपनी पूरी शक्ति से मां का आह्वान करते हैं। कहीं डांडिया तो कहीं गर्बा, कहीं भंगड़ा, तो कहीं मनमोहक रसीली संगीत में विभोर मां के कारनामों पर झांकियां करते कलाकार – एक अजीब सा सुन्दर माहौल हो जाता है जब नवरात्री का त्योहार आता है।
नाचती गाती और मनमोहक धुनों पर थिरकती एक अलग मनभावन दुनियां। ऐसा प्रतीत होता है कि इन नौ दिवस में लोगों के मन से भय, क्रोध, आलस, दुश्मनी, लालच सब नष्ट हो चुका हो। जैसे कहीं कोई बैर न हो कहीं कोई गैर न हो। चारों ओर भाईचारा और अपनापन। एक स्वर्ग सा माहौल। हर कोई भूखे को अन्न खिलाने में जुट जाता है। मानो जैसे हर मानव में कोई ईश्वरीय शक्ति का वास हो रहा हो। और जैसे इश्वर कभी किसी को भूखा नहीं रखता वैसे ही नवरात्री के पावन पर्व पर हर रोज भूखों का पेट भरने के लिए लोग अपना भण्डारा खोल देते हैं। नवरात्री के अष्टमी और नौवमी के दिन व्रतधारी नौ कन्याओं की कंजिका पूजन कर अपना व्रत तोड़ देते हैं।

भारत एक ऐसा देश है जहां विविध भांति के और संप्रदाय के लोग वास करते हैं। नाना प्रकार की रीतियां विभिन्न प्रकार के संस्कार अलग अलग वेश-भूषा। रहन सहन खाना पानी से लेकर देवी देवता की पहचान और पूजन विधि चाहे कितनी भी भिन्न क्यों न हों पर देश की एकता और अखण्डता में कहीं कोई लोच नहीं कहीं कोई आंच नहीं।
चाहे विचारों में कितनी भी विविधता क्यों न हो पर जब बात भारत मां के आन बान और शान की आ जाती है तब सभी धर्म, संप्रदाय, जाति, क्षेत्र के लोग इकजुट होकर एक ही स्वर में बोलते दिखाई पड़ते हैं। शायद भारत की यही खासीयत है और शायद इसी कारण हमारा भारत दुनियां में सभी देशों से जरा हट कर है। और यही है हमारे खूबसूरत भारत की अनोखी पहचान।

जय माँ आंबे

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